शेर-ओ-शायरी

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तेरी दुनिया में सब्रो-शुक्र से हमने बसर कर ली,
तेरी दुनिया से बढ़कर अब तेरे दोजख में क्या होगा?

-हरीचन्द 'अख्तर'


1.सब्रो-शुक्र- हर काम में धीरज धरना और ईश्वर को धन्यवाद देना

 2. दोजख-नरक, जहन्नुम

 

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दराजी उम्र की हद से जियादा जब सताती है,
बहसरत हम तुझे ऐ मौत घड़ियों याद करते हैं।

-'शाद' अजीमाबादी


1.दराजी-लम्बाई 2.
बहसरत-तीव्र इच्छा या अभिलाषा के साथ
 

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दिल ही तो है न संगो-खिस्त दर्द से भर न आये क्यों,
रोयेंगे हम हजार बार, कोई हमे सताये क्यों ?

-मिर्जा 'गालिब'


1.संगो-
-खिस्त -खिस्त-ईंट और पत्थर

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दिलशिकन साबित हुआ, हर आसरा मेरे लिए,
कोई दुनिया में नहीं, मेरे सिवा, मेरे लिए।

-'नातिक' लखनवी


1,दिलशिकन-
दिल तोड़ने वाला, दिल दुखाने वाला

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दुनिया की महफिलों से उकता गया हूँ यारब,
क्या लुत्फ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो।

-मोहम्मद इकबाल

 

1.यारब-यारों, दोस्तों 2.अंजुमन-महफ़िल  

 
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