शेर-ओ-शायरी

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न कोई जादा, न मंजिल , न रौशनी, न सुराग,
भटक रही है खलाओं में जिन्दगी मेरी।

-साहिर लुधियानवी


1.जादा-रास्ता, पथ 2. खला-फिजा, अन्तरिक्ष,फिजा-अ-आसमानी

 

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न जाने किधर जा रही है यह दुनिया,
किसी का यहाँ कोई हमदम नहीं है।

-'असर' लखनवी


1.हमदम-हर समय का साथी, दोस्त, मित्र

 

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न जीने पर ही काबू है, न मरने का इमकां है,
हकीकत में इन्हीं मजबूरियों का नाम इन्सां है।

-'शेरी' भोपाली


1.इमकां-संभावना

 

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न देखने की तरह हमने जिन्दगी देखी,
चिराग बुझने लगा जब तो रौशनी देखी।

-'असर' लखनवी
 

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न किसी के आँख का नूर हूँ, न किसी के दिल का करार हूँ,
जो किसी के काम न आ सके मैं वो एक मुश्ते-गुबार हूँ।
मेरा रंग रूप बिगड़ गया, मेरा यार मुझसे बिछड़ गया,
जो चमन खिजाँ से उजड़ गया मैं उसी की फस्ले-बहार हूँ।
न तो मैं किसी का हबीब हूँ न तो मैं किसी का रकीब हूँ,
जो बिगड़ गया वह नसीब हूँ, जो उजड़ गया वह दयार हूँ।
पए-फातहा कोई आये क्यों कोई चार फूल चढ़ाये क्यों,
कोई आके शम्अ जलाये क्यों मैं वो बेकसी का मजार हूँ
मैं नहीं हूँ नग्मा-ए-जाँफिजा कोई सुनके मुझको करेगा क्या,
मैं बड़े बिरोग की हूँ सदा मैं बड़े दुखों की पुकार हूँ।

-बहादुर शाह 'जफर'


1.मुश्ते-गुबार-मुट्ठी भर धूल 2. खिजाँ-पतझड़ की ऋतु 3.फस्ले-बहार-बसन्त  ऋतु 4.हबीब- मित्र, सखा, दोस्त 5. रकीब-प्रतिद्वन्द्वी, जिससे मुकाबला हो, किसी स्त्री से प्रेम करने वाले दो व्यक्ति परस्पर रकीब होते हैं 6. दयार-स्थान, जगह, मुकाम 7. पए-फातहा-मृतक की आत्मा को शान्ति पहुंचाने के लिए कुरान की आयतें पढ़ने वाला 8. जाँफिजा-प्राणों को बढ़ाने वाला,प्राणवर्धक  9. बिरोग-
दुःख , तकलीफ, कष्ट 10. सदा-आवाज
 

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