शेर-ओ-शायरी

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नाकामियों के खौफ ने दीवाना कर दिया,
मंजिल के सामने भी पहूँच के निराश हूँ।

-बहजाद लखनवी

 

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नादाँ हो जो कहते हो क्यों जीते हो 'गालिब',
किस्मत में है मरने की तमन्ना कोई दिन और।

-मिर्जा 'गालिब'
 

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नाम अलबता सुनते आये हैं,
हम नहीं जानते खुशी क्या है?

-'असर' लखनवी

 

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नींद भी मौत बन गई है, 'अदम',
बेवफा रात भर नहीं आती।

-अब्दुल हमीद 'अदम'
 

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पहले आती थी हाले-दिल पै हँसी,
अब किसी बात पै नहीं आती।

-मिर्जा 'गालिब'

 

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