शेर-ओ-शायरी

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फूल तो दो दिन बहारे-जाँफिजा दिखला गए,
हसरत उन गुंचों पै है जो बिन खिले मुरझा गए।

-अब्राहम 'जौंक'


1.
बहारे-जाँफिजा-प्राणों को बढ़ाने वाली बहार,प्राणों में नई जान डालने वाली बहार 2 गुंचा - कली

 

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फूलों से जो खेला करते थे, दर-दर की ठोकरें खाते हैं,
जीने की तमन्ना थी जिनको अब जीने से घबराते हैं।

-'मंजूर' सिद्दकी अकबराबादी

 

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बड़ी मुश्किल से आता है मयस्सर जिन्दगी भर में,
एक वह लमहा जिसे इन्साँ गुजारे शादमाँ होकर।

-'शफक' टौंकी
 

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बनाने वाले बना लें हजार अफ्सानें ,
मगर मेरे गमे-पिन्हाँ को कोई क्या जाने।

-'वफा' दरभंगवी


1.गमे-पिन्हा- छुपे हुए गम


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