शेर-ओ-शायरी

<< Previous  रंज-ओ-ग़म  (Sorrows and sufferings)  Next>>

बहना कुछ अपनी चश्म का दस्तूर हो गया,
दी थी खुदा ने आंख ,पै नासूर हो गया।

-सौदा


1.चश्म-आँख, नेत्र, नयन 2. नासूर-एक प्रकार का घाव जो हमेशा रिस्ता रहता है और कभी अच्छा नहीं होता।
 

*****


बहार आती है और मैं डर रहा हूँ,
कि अक्सर मुझको रास आती नहीं है।

-'आसी' उल्दानी

 

*****

बहुत मुश्किल है कैदे-जिन्दगी में मुतमइन होना,
चमन भी इक मुसीबत था कफस भी इक मुसीबत है।

-'सीमाब' अकबराबादी


1
.मुतमइन -
संतुष्ट  कफस-पिंजड़ा, कारागार


*****


बिक गये जब तेरे लब, तुझको क्या शिकवा अगर,
जिन्दगी बादा -ओ -सागर में बहलाई गई।
ऐ गमे -दुनिया तुझे क्या इल्म तेरे वास्ते
किन-किन बहानों से तबिअत राह पर लाई गई।

-'साहिर' लुधियानवी


1.बादा-ओ–सागर - शराब औ शराब का पियाला


*****

 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58  Next >>