शेर-ओ-शायरी

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मरने की दुआयें क्यों माँगू जीने की तमन्ना कौन करे,
ये दुनिया या वो दुनिया अब ख्वाहिशे-दुनिया कौन करे?
जब कश्ती साबितो-सालिम थी, साहिल की तमन्ना किसको थी,
अब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर, साहिल की तमन्ना कौन करें?
-मुईन अहसन जज्बी


1.साबितो-सालिम-
ठीकठाक, सही हालत में 2. साहिल- किनारा, तट 3. शिकस्ता-टूटी हुई


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मरने वाले तो खैर बेबस हैं,
जीने वाले कमाल करते हैं।
-अब्दुल हमीद 'अदम'

 

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माजी की याद, आज का गम, कल की उलझनें,
सबको मिलाइए, मेरी तस्वीर बन गई।


1.माजी-
अतीत


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माना कि आंसुओं को पीना है मस्लेहत,
आँसू जो फिर भी उमड़ ही आयें तो क्या करें?

-'असर' लखनवी


1.मस्लेहत-(
i)हित, भलाई (ii) सलाह, परामर्श


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