शेर-ओ-शायरी

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मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है
क्या मेरे हक में फैसला देगा?
जिन्दगी को करीब से देखो
इसका चेहरा तुम्हें रूला देगा।

-सुदर्शन काफिर


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मेरा रंग-रूप बिगड़ गया मेरा यार मुझसे बिछड़ गया,
जो चमन खिजां से उजड़ गया मैं उसी की फस्ले-बहार हूँ।
न तो मैं किसी का हबीब हूँ न तो मैं किसी का रकीब हूँ,
जो बिगड़ गया वह नसीब हूँ, जो उजड़ गया, वह बहार हूँ।

-बहादुरशाह 'जफर'


1.फस्ले-बहार -
वसन्त ऋतु 2. हबीब- सखा, दोस्त, मित्र 3. रकीब-प्रतिद्वन्द्वी, जिससे मुकाबिला हो, एक स्त्री से प्रेम करने वाले दो व्यक्ति परस्पर रकीब होते हैं 4.गुबार-धूल, रज

 

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मेरी किस्मत में गम गर इतना था,
दिल भी यारब कई दिये होते।

-मिर्जा 'गालिब'


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मेरी हस्ती पै गम इस तरह छाया है कि अब 'अख्तर',
खुशी की आरजू दीवानगी मालूम होती है।

-'अख्तर' अंसारी

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