शेर-ओ-शायरी

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मेरे खुदा मुझे अब यह भी सोचना होगा,
करम किया कि सितम आदमी बना के मुझे।

-जांवर फतेहपुरी


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मेरे गमख्वार मेरे दोस्त तुझे क्या मालूम,
जिन्दगी मौत के मानिन्द गुजारी मैंने।

-कतील शिफाई


1.गमख्वार -हमदर्द, दर्द या दुख बांटने वाला 2. मानिन्द -समान, तरह

3. लब- होंठ

 

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मेरे लबों का तबस्सुम तो सबने देख लिया,
जो दिल पै बीत रही है वो कोई क्या जाने।


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मैं कहूँगा न दास्ताँ अपनी,
फिर कहोगे, सुनी नहीं जाती।

-'फलक' देहलवी

 

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