शेर-ओ-शायरी

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मौत का भी इलाज हो शायद,
जिन्दगी का कोई इलाज नहीं।

-'फिराक' गोरखपुरी


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मौत में भी जीस्त देखने वालों,
देख लो जीस्त में फना हैं हम।

-'असर' लखनवी


1.जीस्त-जिन्दगी 2. फना- (i)नष्ट, बरबाद (ii) मौत, मृत्यु

 

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मौतो-हस्ती की कशाकश में कटी उम्र तमाम,
गम ने जीने न दिया शौक ने मरने न दिया।


1.कशाकश-खींचातानी, आपाधापी, भागमभाग


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यह तलातुम बहरे-हस्ती में नहीं है बेसबब,
आ गई है कश्ति-ए-दिल, जेरे-मौजे-गम कहीं।

-अलम मुजफ्फरनगरी


1.तलातुम-तूफान, हलचल 2.बहरे-हस्ती-जीवन-सागर 3. बेसबब-अकारण, बिना कारण 4. कश्ति-ए-दिल -दिल की कश्ती 5. जैरे-मौजे-गम -गम की लहरों के नीचे


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