शेर-ओ-शायरी

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यादे-माजी अजाब है यारब,
छीन ले मुझसे हाफिजा मेरा।

-'अख्तर' अंसारी


1.यादे-माजी -अतीत की याद, बीते समय की याद 2.अजाब-यातना, पीड़ा, दुख, तकलीफ


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यारब यह भेद क्या है कि राहत की फिक्र ने,
इन्सां को और गम में गिरिफ्तार किया है।

-'जोश' मलीहाबादी

 

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यूँ आंसुओं के साथ पिया हमने खूने-दिल,
जैसे मिला के पीते हैं पानी शराब में।
-बहादुर शाह 'जफर'


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यूँ तो जिये सारी उम्र लेकिन,
जीने की तरह जी न सके हम।

-'अख्तर' अंसारी


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