शेर-ओ-शायरी

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यूँ तो मरने के लिये जहर पीते हैं सभी,
जिन्दगी तेरे लिये जहर पिया मैंने।
-'खलील' रहमान आजमी


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यूँ तो मेरी रगे-जाँ से भी थे नजदीकतर,
आसुंओं के धुंध में लेकिन न पहचाने गये।

-खातिर गजनवी


1.रगे-जाँ - सबसे बड़ी खून की नस जो दिल में जाती है 2.नजदीकतर - बहुत पास

 

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रगों में दौड़ते-फिरने के हम नहीं कायल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है,
चिपक रहा है बदन पै लहू से पैराहन,
हमारी जेब को अब हाजते - रफू क्या है,
रही न ताकते-गुफ्तार और अगर हो भी,
तो किस उम्मीद पै कहिए कि आरजू क्या है।

-मिजा 'गालिब'


1.पैराहन- वस्त्र, लिबास 2. हाजते-रफू- रफू की आवश्यकता 3. ताकते-गुफ्तार- बात करने की शक्ति


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रहा बर्के-तपां से साबिका तकदीर में इतना,
कि अब अपना निशेमन, हम बनाते हैं शरारों में।

-'आसी' उल्दानी


1. बर्के-तपां - कौंधती बिजली 2. साबिका –संबंध 3.निशेमन -.आशियाना, घोंसला, नीड़ 4 शरारा -अग्निकण,चिंगारी

 

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