शेर-ओ-शायरी

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आता है दागे-हसरते-दिल का शुमार याद,
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।
-मिर्जा 'गालिब'


1.दागे-हसरते-दिल- दिल की नाकाम
हसरतें 2.शुमार - गिनती,गणना।

 

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आदमी को सिर्फ वहम है पास उसके ही इतना गम है,
पूछो हंसते हुए चेहरों से, आँख भीतर से कितनी नम है।

-नासिर काजिमी

 

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आसमाँ से कभी देखी न गई अपनी खुशी,
अब यह हालत है कि हम हँसते हुए डरते हैं।

-'अख्तर' अंसारी

 

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आसान नहीं इस दुनिया में ख्वाबों के सहारे जी लेना,
संगीन-हकीकत है दुनिया, यह कोई सुनहरा ख्वाब नहीं।

-सागर' निजामी


1.संगीन - सख्त, कड़ा, कठोर।
 

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