शेर-ओ-शायरी

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रहा है साबिका गम से यहाँ तक हमनशीं मुझको,
खुशी के नाम से भी अश्क आँखों में भर आते हैं।

-'असर' लखनवी


1.साबिका-सम्बन्ध, लगाव 2. हमनशीं-साथ बैठने वाला, मित्र

सभासद, मुहासिब


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रहिए अब ऎसी जगह चलकर जहाँ कोई न हो,
हमसुखन कोई न हो, हमजुबाँ कोई न हो।
बेदरो - दीवार का इक घर बनाना चाहिए,
कोई हमसाया न हो, और पासबाँ कोई न हो।
पड़िए गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार,
और अगर मर जाइओ तो नौहाख्वाँ कोई न हो।

-मिर्जा 'गालिब'


1.हमसुखन-साथ-साथ बात या कविता करने वाला 2. हमजुबाँ-एक भाषा बोलने वाला, दोस्त, मित्र 3,हमसाया-पढ़ोसी, प्रतिवेशी

4 पासबाँ-देखरेख करने वाला, निगराँ, निरीक्षक 5. तीमारदार-सेवा करने

वाला, सेवादार 6. नौहाख्वाँ-मृतक पर विलाप करने वाला

 

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रही न ताकते-गुफ्तार और अगर हो भी हो तो,
किस उम्मीद पै कहिए कि आरजू क्या है?

-मिर्जा 'गालिब'


1.गुफ्तार-(i) बातचीत, वार्तालाप (ii) बोली, वाणी, शब्द


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रिसते है शाख-शाख पर फूलों के आबले,
गुलशन में आये हैं कि बयाँबां में आये हैं।

-बाकी सिद्दकी


1.आबला-छाला, फफोला 2. बयाँबां- वन, जंगल

 

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