शेर-ओ-शायरी

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लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद,
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम।

-'साहिर' लुधियानवी


1.रिश्ता-(i) डोरा, तागा (ii) सम्बन्ध, नाता, लगाव


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वक्फा -ए-मर्ग अब जरूरी है,
उम्र तय करते थक गये हैं।

-मीरतकी 'मीर'


1.वक्फा- दो कामों के बीच में ठहराव का समय, विराम, इन्टरवल, कालान्तर, ठहराव 3.मर्ग- मृत्यु

 

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वह जाम हूँ जो खूने-तमन्ना से भर गया,
यह मेरा जर्फ है कि छलकता नहीं हूँ मैं।

-'फना' लखनवी


1.जर्फ-सहनशीलता, धैर्य, सब्र


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वह ताइरे - असीर कहाँ जाये क्या करे,
आजाद होके जिसको नसीब आशियाँ न हो।

-'असर' लखनवी

 

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