शेर-ओ-शायरी

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संदल का मैं दरख्त नहीं था तो किस लिए,
जितने थे गम के नाग, मुझी से लिपट गये।


1
.संदल - चंदन


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सब तमन्नाएं हमारी मर चुकीं,
एक मरने की तमन्ना रह गई है।

-जोश मल्सियानी
 

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सब मरहले हयात के तय करके अब 'फिराक',
बैठा हुआ हूँ मौत में ताखीर देख कर।

-'फिराक' गोरखपुरी


1.मरहला -
गंतव्य, उतरने का स्थान, मंजिल 2. हयात -जिन्दगी, जिन्दगानी 3. ताखीर -विलंब, देर


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सबब हर एक मुझसे पूछता है मेरे रोने का,
इलाही सारी दुनिया को मैं कैसे राजदाँ कर लूँ।


1.सबब -कारण, वजह 2. इलाही - हे खुदा 3.राजदाँ -भेद जानने वाला, बहुत घनिष्ठ मित्र

 

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