शेर-ओ-शायरी

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सुकूने-दिल जहाने-बेशोकम में ढूंढने वाले,
यहाँ हर चीज मिलती है, सुकूने-दिल नहीं मिलता।

-जगन्नाथ 'आजाद'


1.जहाने-बेशोकम -
कम और ज्यादा यानी हानि-लाभ, नफा-नुकसान का हिसाब करने वाली दुनिया


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सुनते हैं खुशी भी है जमाने में कोई चीज,
हम ढूँढ़ते फिरते हैं कहाँ है, किधर हैं?

-मिर्जा 'दाग'

 

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सुरूरे-शब की नहीं सुबह का खुमार हूँ मैं,
निकल चुकी है जो गुलशन से वह बहार हूँ मैं।

-'अजीज' लखनवी


1.सुरूरे-शब- रात का चढ़ता हुआ नशा 2. खुमार - सुबह का उतरता हुआ नशा, हल्का नशा


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हजार जब्त किया फिर भी आ गये आँसू,
अगर किसी ने कहा हमसे मुस्कुराने को।

-फिरोज जहाँ अलमास


1.जब्त
-सहनशक्ति, बर्दाश्त, सहशीलता 

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