शेर-ओ-शायरी

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हर लिया है किसी ने सीता को,
जिन्दगी है या राम का बनवास।


-'फिराक' गोरखपुरी

 

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हुए जिस पै मेहरबां तुम कोई खुशनसीब होगा,
मेरी हसरतें तो निकली मेरे आंसुओं में ढलकर।

-एहशन दानिश

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हुए हम जो मर के रूसवा, हुए क्यों न गर्के –दरिया,
न कभी जनाजा उठता न कहीं मजार होता।

-मिर्जा 'गालिब'


1.गर्के-दरिया- नदी में डूब जाना


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हैरत कि गमकदे में खुशी का गुजर कहाँ,
तुम आ गये तो रौनके-काशाना हो गया।

- अब्दुल हमीद अदम


1.गमकदा  - गम का घर, जहॉं दुख ही दुख हो 2. रौनके-काशाना - घर की रौनक


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हो चुकीं'गालिब' बलायें सब तमाम,
एक मर्गे - नागहानी और है।

-मिर्जा 'गालिब'


1.मर्गे-नागहानी- अचानक या आकस्मिक मौत

 

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