शेर-ओ-शायरी

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इक संभलते हम नजर आते नहीं,
वरना गिर-गिर कर गए लाखों संभल।
कब तक आखिर ठहर सकता है वह घर,
आ गया बुनियाद में जिसकी खलल।

-'ख्वाजा' हाली


1.खलल – (i) विकार, खराबी (ii) विध्न, बाधा, अड़चन (iii) हस्तक्षेप, दख्लअंदाजी।

 

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इक किरन भी तो नहीं, गम की अंधेरी रात में,
कोई जुगनू, कोई तारा, कोई आंसू कुछ तो होता।

 

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इक दिन की बात हो तो उसे भूल जायें हम,
नाजिल हों दिल पै रोज बलायें तो क्या करें।
-'अख्तर' शीरानी


1. नाजिल - ऊपर से नीचे आने वाला, उतरने वाला, उतरा हुआ, आया हुआ

 

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इक शामे-गम को सुबहे-मसर्रत न मिल न सकी,
कितने ही आफताब चढ़े और ढल गये।
-राही शिहाबी


1.मसर्रत - खुशी, हर्ष, आनन्द 2. आफताब - सूर्य

 

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