शेर-ओ-शायरी

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इधर-उधर यहाँ वहाँ हैं बिजलियाँ ही बिजलियाँ,
चमन चमन कहाँ फिरूँ मैं आशियाँ लिये हुए।
 

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इन्तिजारे-फस्ले-गुल में खो चुके आँखों के नूर,
और बहारे-बाग लेती ही नहीं आने का नाम।


1.फस्ले-गुल- बहार का मौसम, वसन्त ऋतु।

 

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इब्ने-मरियम हुआ करे कोई,
मेरे दर्द की दवा करे कोई।
बक रहा हूँ जुनूँ में क्या कुछ,
कुछ न समझे खुदा करे कोई।
-'मिर्जा' गालिब


1.इब्ने-मरियम- मरियम का पुत्र ईसा मसीह, जो लोगों को निरोग करते-फिरते थे।

 

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इस कायनाते - गम में खुशियाँ कहाँ मयस्सर,
दीवाना ढूँढ़ते हैं सहरा में आबो - दाना।
-शकील बदायुनी


1.कायनात - संसार, दुनिया, ब्रहमाण्ड 2.सहरा - वन, जंगल, मरूस्थल, रेगिस्तान 3. आबो-दाना -  दाना-पानी, अन्न-जल, रोजी, जीविका।

 

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