शेर-ओ-शायरी

<< Previous  रंज-ओ-ग़म (Sorrows and sufferings)  

Next >>

इस दौर में जिन्दगी बशर की,
बीमार की रात हो गयी है।

-'फिराक' गोरखपुरी


1.बशर- मनुष्य, मानव, आदमी

 

*****


इसको क्या कहिये कि हम हर हाल में जलते रहे,
दूरियों में चाँद थे, कुर्बत में परवाने हुए।

-'खातिर' गजनवी


1.कुर्बत - सामीप्य, नजदीकी, निकटता 2. परवाना - शलभ, पतंगा।

 

*****

इसी पै नाज घड़ी दो घड़ी जली होगी,
इसी पै शम्अ हमारी बराबरी होगी।
 

*****


उम्मीदी-नाउम्मेदी का वहम होना वही जाने,
कि जिसने कश्तियों को डूबते देखा हो साहिल पर।

1.साहिल - किनारा।

 

*****

 

<< Previous  page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58  Next >>