शेर-ओ-शायरी

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तेरा करम तो आम है दुनिया के वास्ते,
मैं कितना ले सका, मुकद्दर की बात है।

1. करम - कृपा, मेहरबानी


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तेरी नवाजिशे-पैहम का शुक्रिया लेकिन,
वह क्या करे जिसे कुरबत भी रास न आ सके।

-'अर्श' भोपाली


1.नवाजिशे-पैहम - निरंतर कृपा 2. कुरबत - नजदीकी

 

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तेरे दामन में गुलिस्तां भी है वीराने भी,
मेरा हासिल, मेरी तकदीर, बता दे मुझको।

-साहिर लुधियानवी


1.हासिल -(i)उपलब्ध, दस्तयाव (ii) प्राप्ति (iii)आमदनी, आय (iv)निष्कर्ष, नतीजा
 

 

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दौराने-असीरी नजरों में हर वक्त नशेमन रहता था,
जब छूट के आये गुलशन में, हम अपना ठिकाना भूल गये।

-'जेब' बरेलवी


1.असीरी - कैद, कारावास 2. नशेमन - घोंसला, नीड़

 

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