शेर-ओ-शायरी

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न मिला सुरागे-मंजिल कहीं उम्र भी किसी को,
नजर आ गई है मंजिल कहीं दो कदम ही चल के।

-'शकील' बदायुनी


1.सुरागे - पता, निशान, ठिकाना

 

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नतीजा एक ही निकला कि थी किस्मत में नाकामी,
कभी कुछ कहके पछताए, कभी चुप रहके पछताए।
 

 

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निगाहे-यार मुझसे आज बेतकसीर फिरती हैं,
किसी की कुछ नहीं चलती, जब तकदीर फिरती है।

-गाफिल


1.बेतकसीर - बिना किसी कुसूर के


 

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पीछे-पीछे हसरतों का काफिला,
आगे-आगे है परीशानी मेरी।

-'दिल' शाहजहाँपुरी

 

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