शेर-ओ-शायरी

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फलक के तारों से क्या दूर होगी जुल्मते-शब,
जब अपने घर के चरागों से रौशनी न मिली।

-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.फलक - आकाश, आस्मान 2. जुल्मते-शब - रात का अंधकार

 

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फूल तो दो दिन बहारे-जाँफिजा बिखरा गये,
हसरत उन गुन्चों पै है जो बिन खिले मुर्झा गये।

-अब्राहम जौक


1.जाँफिजा - प्राणों को बढ़ाने वाला, प्राणवर्धक 2. गुंचा - कली

 

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फूल बनने की खुशी में मुस्कुराई थी कली,
क्या खबर थी यह तबस्सुम मौत का पैगाम है।

 

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फूल खिलते हैं गुलशन-गुलशन,
लेकिन अपना - अपना दामन।

-'जिगर' मुरादाबादी

 

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