शेर-ओ-शायरी

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बढ़ते-बढ़ते हद्दे-मंजिल से भी आगे बढ़ गये,
हम तो आजिज आ गये नाकामी-ए-तकदीर से।


1.आजिज - परीशान, बेबस, लाचार

 

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भंवर से बच निकलना तो कोई मुश्किल नहीं लेकिन,
सफीने एन दरिया के किनारे डूब जाते हैं।

 

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मुखालिफ बख्त हो तो काम बन-बन कर बिगड़ता है,
सफीना जा पड़ा मझदार में टकरा के साहिल से।

-बिस्मिल आर्वी


1.बख्त - किस्मत, भाग्य 2. सफीना - नौका, किश्ती 3. साहिल - किनारा, तट


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मुझे रोकेगा तू ऐ नाखुदा क्या गर्क होने से,
कि जिसे डूबना हो डूब जाते हैं सफीनों में।
-मोहम्मद इकबाल


1.नाखुदा - मल्लाह, नाविक 2. गर्क - डूबना 3. सफीना- नौका, किश्ती

 

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