शेर-ओ-शायरी

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मेरी तकदीर में मंजिल नहीं हैं,
गुबारे -कारवाँ है और मैं हूँ।

 

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मेरी बिगड़ी को भी यारब बना देगा तो जानूंगा,
बनाने को बनाया, आसमां तूने, जमीं तूने।

-जोश मल्सियानी

 

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मेरे कैद का दिलशिकन मामला था,
बहार आ गई थी, आशियाँ बन गया था।

-साकिब लखनवी


1.दिलशिकन - दिल को तोड़ने वाला, रंज पहुंचाने वाला

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मेरे डूब जाने का बाइस न पूछो,
कनारे से टकरा गया था सफीना।
-हफीज जालंधरी


1.बाइस - कारण 2. सफीना - नौका, किश्त

 

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