शेर-ओ-शायरी

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यह इन्किलाबे -गर्दिशे- दौरां तो देखिए,
मंजिल पै वो मिले जो शरीके-सफर थे।


1.इन्किलाबे-गर्दिशे- दौरां - समय का फेरबदल 2. शरीके-सफर - सफर में शामिल

 

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यह मुमकिन है कि लिखी हो कलम ने फतह आखिर में,
जो है अहबाबे-हिम्मत, गम नहीं करते शिकस्तों में।


1.अहबाबे-हिम्मत - हिम्मत वाले, हिम्मती
 

 

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यह मेरी किस्मत कि नजरों में तुम्हारी हेच हैं,
वर्ना यह जिन्से-वफा इतनी तो कमकीमत न थी।
-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.हेच- (i) तुच्छ (ii) व्यर्थ, बेकार 2. जिन्स- वस्तु, चीज

 

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यहाँ तंगिए-कफस है वहाँ खत्म आशियाना
न यहाँ मेरा ठिकाना, न वहा मेरा ठिकाना
इक शाखे-सिरनगूँ पर रख लेंगे चार तिनके के
न बुलन्द शाख होगी, न जलेगा आशियाना ।


1. तंगिए-कफस - पिंजड़े की तंग जगह 2. शाखे-सिरनगूँ - झुकी हुई डाल

 

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