शेर-ओ-शायरी

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मेरे डूब जाने का बाइस न पूछो,
कनारे से टकरा गया था सफीना।
-हफीज जालंधरी


1.बाइस - कारण 2. सफीना - नौका, किश्त

 

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मैं उनमें हूँ जो होकर आस्ताने-दोस्त से महरूम,
लिये फिरते हैं सिज्दों की तड़प अपनी जबीनों में।
-अख्तर अंसारी


1.आस्ताना - चौखट, दहलीज 2.महरूम - (i) वंचित रहना, न पाना, प्राप्त न होना (ii) निराश, नाउम्मेद (iii) अभागा, बदकिस्मत

3.सिज्दा - ईश्वर के लिए सर झुकाना, नमाज में जमीन पर सर रखना 4.जबीन -माथा, ललाट, पेशानी, भाल

 

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यह इन्किलाबे -गर्दिशे- दौरां तो देखिए,
मंजिल पै वो मिले जो शरीके-सफर थे।


1.इन्किलाबे-गर्दिशे- दौरां - समय का फेरबदल 2. शरीके-सफर - सफर में शामिल

 

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यह मुमकिन है कि लिखी हो कलम ने फतह आखिर में,
जो है अहबाबे-हिम्मत, गम नहीं करते शिकस्तों में।


1.अहबाबे-हिम्मत - हिम्मत वाले, हिम्मती
 

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