शेर-ओ-शायरी

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वाय किस्मत आज बज्मे-यार में,
लबकुशा हैं गैर, मैं खामोश हूँ।

-'अब्र' जोधपुरी
1.बज्म - महफिल 2.लबकुशा - बात करने वाले, बात करते हुए

 

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वाय किस्मत जब कफस का दर खुला,
उड़ गई ताकत परे-परवाज की।


1.कफस - पिंजड़ा 2.दर - दरवाजा 3. परे-परवाज - पंखों की

उड़ने की( ताकत)

 

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वाय किस्मत नाव डूबी आके साहिल के करीब,
देखता ही रह गया साहिल को मैं, साहिल मुझे।

-'सादिक' झुनझुनवी


1.साहिल - तट, किनारा

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शिकवा नहीं किसी से, किसी से गिला नहीं,
नसीब में जो नहीं था हम को मिला नहीं।

 

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