शेर-ओ-शायरी

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हमें तो मौसमे-गुल ने भी कर दिया रूसवा,
सुना है लोग सलामत खिजाँ में रहते हैं।


1.मौसमे-गुल - बहार का मौसम 2. खिजाँ - पतझड़ का मौसम
 

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हर एक उनसे बचाता है अपने दामन को,
चमन में रहके भी कांटों की जिन्दगी क्या है।

 

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हर फूल की किस्मत में गुलदाँ नहीं होता,
हर शख्स मुकद्दर का सुलेमाँ नहीं होता।


1.गुलदाँ - गुलदस्ता सजाने का पात्र


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हसरत पै उस मुसाफिरे-बेकस रोइए,
जो थक के बैठ जाता हो मंजिल के सामने।

-गुलाम हमदानी मुवहफी


1.बेकस - बेबस, निस्सहाय, निराश्रय

 

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