शेर-ओ-शायरी

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एक पत्थर की तकदीर भी संवर सकती है,
शर्त यह है कि उसे सलीके से संवारा जाए।

 

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एक सेज का सिंगार, एक अर्थी पै निसार,
दो फूल साथ-साथ खिले थे बहार में।


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ऐ दिल तुझे जेबा नहीं साकी की खुशामद,
मैखाना खिंचा आयेगा, किस्मत में अगर है।


1.जेबा - शोभा देना, सुन्दर लगना

 

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ऐसी किस्मत कहाँ कि जाम आता,
बू-ए-मय भी इधर नहीं आती।

-'मुज्तर' मुजफ्फरनगरी


1.जाम - शराब पीने का पियाला, पानपात्र

2. बू-ए-मय - शराब या मदिरा की सुगंध

 

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