शेर-ओ-शायरी

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कहीं सागर लबालब हैं, कहीं खाली पियाले हैं,
यह कैसा दौर है साकी, यह क्या तकसीम है साकी।


1.सागर - शराब का पियाला

2. तकसीम - बंटवारा, विभाजन, हिस्सा आदि बांटना, बांट

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कांटे किसी के हक में, किसी को गुलो-समर,
क्या खूब एहतिमामे-गुलिस्ताँ है आजकल।

-'जिगर' मुरादाबादी


1.गुलो-समर - फूल और फल 2. एहतिमाम - प्रबन्ध

 

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काट दी उम्र परस्तारिए-गुलशन में 'फिराक',
पर न हुआ फिर भी एक भी गुलेतर अपना।

-'फिराक' गोरखपुरी


1. परस्तारी- पूजा, आराधना, इबादत 2. गुलेतर - एक फूल

 

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किससे महरूमिए-किस्मत की शिकायत कीजे,
हमने चाहा था कि मर जायें सो वो भी नहीं हुआ।
-मिर्जा गालिब


1.महरूमिए-किस्मत - बदकिस्मती

 

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