शेर-ओ-शायरी

<< Previous   तक़दीर ( Destiny )  Next >>

किसी जा गर्द में मोती, कहीं है गर्द मोती में
तेरी राहों को ऐ तकदीर मैंने खूब छाना हैं।
-'आर्जू' लखनवी


1. जा - स्थान, जगह 2. गर्द - रज, धूल, खाक


*****

 

किस्मत की खूबी देखों, टूटी कहाँ कमंद,
दो-चार हाथ जब कि लबे-बाम रह गया।

-सौदा


1.कमंद - एक लंबी रस्सी जिसके एक सिरे पर गोह बंधी रहती थी। उसके द्वारा ऊंची-ऊंची दीवारों पर चढ़ा जा सकता था।
गोह वहां चिपक जाती है।

फिर कितना ही जोर किया जाए, वह वहाँ से नहीं छूटती।
2. लबे-बाम – छत का किनारा

 

*****

किस्मत पै उसकी रोइए जितना भी हो सके,
दरिया के पास जो कोई प्यासा दिखाई दे।

 

*****

 

कुछ ऐसे फूल हैं जिन्हें मिला नहीं माहौल,
महक रहे हैं मगर जंगलों में रहते हैं।
 

*****

                 

<< Previous  page - 1-2-3-4-5-6 7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24  Next >>