शेर-ओ-शायरी

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जिसकी कफस में आंख खुली हो मेरी तरह,
उसके लिये चमन की खिजाँ क्या, बहार क्या।


1.कफस - पिंजड़ा, करागार 2. खिजाँ - पतझड़ की ऋतु

 

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तकदीर बनाने वाले तुमने तो कोई कमी नहीं की,
अब किसको क्या मिला ये मुकद्दर की बात है।

 

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तमाम उम्र हम वफा के गुनहगार रहे,
यह और बात है कि हम आदमी तो अच्छे थे।

-नदीम कासिमी


1.वफा के गुनहगार - वफा के बदले वफा का न मिलना

 

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तमाम उम्र उम्मीदे-बहार में गुजरी,
बहार आई तो पैगाम मौत का लाई।

-नज़्म मुजफ्फरनगरी


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