शेर-ओ-शायरी

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मिल ही जाएगी ढूंढने वाले को बहार,
हर गुलिस्तां में खिजां हो यह जरूरी नहीं।

-'इकबाल'


1. खिजां - पतझड़ की ऋतु 'इकबाल'

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मेरे दिले-मायूस में क्यों कर न हो उम्मीद,
मुरझाए हुए फूलों में क्या बू नहीं होती।

-'अख्तर' अंसारी


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मेरे दोस्तों की दिलआजारियों में,
मेरी बेहतरी की कोई बात होगी।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.दिलआजारी- कोई ऐसी बात कहना या करना, जिससे किसी का दिल दुखे, सताना, कष्ट देना

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यह मुमकिन है कि लिखी हो कलम ने फतह आखिर में,
जो है अहबाबे-हिम्मत, गम नहीं करते शिकस्तों में।


1.अहबाबे-हिम्मत - हिम्मत वाले, हिम्मती


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