शेर-ओ-शायरी

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यह रात अंधेरी है, मगर ऐ गमे-फर्दा,
सीनों में अभी शम्ए-यकीं जाग रही है।
-'फिराक' गोरखपुरी


1.गमे-फर्दा - आने वाला गम (फर्दा-आगे आने वाला कल)


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यही कहकर अजल को कर्जख्वाहों की तरह टाला,
कि लेकर आज कासिद, यार का पैगाम आयेगा।
-शाद अजीमाबादी


1.अजल - मृत्यु 2.कर्जख्वाह - कर्ज लेने वाला, ऋणेच्छुक 3.कासिद - डाकिया, पत्रवाहक 4.पैगाम - संदेश

 

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रहेंगे न ये दिन मल्लाह हमेशा,
थोड़े दिन में गंगा उतर जायेगी।

-'ख्वाजा' हाली


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वह गुल ताजा होंगे, जो मुर्झा गए हैं
छटेंगे यह बादल भी जो छा गए हैं।
वह संभलेंगे गेसू जो बलखा गए हैं,
बहार आ रही है, खिजां के सहारे।

-'अफसर' मेरठी


1.खिजां - पतझड़ की ऋतु

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