शेर-ओ-शायरी

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 इक नई बुनियाद डालेंगे तजस्सुम की 'शफा'
हर गुबारे-कारवां में कारवाँ ढूढ़ेंगे हम।
-'शफा' ग्वालियरी

1. तजस्सुम - खोज, तलाश।

 

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इन्हीं गम की घटाओं से, खुशी का चांद निकलेगा,
अंधेरी रात के पर्दों में, दिन की रौशनी भी है।


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इन्हीं जर्रों से कल होंगे, नए कुछ कारवां पैदा,
जो जर्रे आज उड़ते हैं गुबारे -कारवां होकर।
-'शफक' टौंकी

 

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उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले,
गो दब गए हैं बारे-गमे-जिन्दगी से हम।
-'साहिर' लुधियानवी


1.वलवला - उत्साह, हौसला, उम्मीद 2. बार - बोझ, भार, वजन


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