शेर-ओ-शायरी

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 ऐ शम्अ सुबह होती है, रोती है किसलिए,
थोड़ी-सी रह गई है, इसे भी गुजार दे।
- अग्गाजान ऐस
 

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कफस में मुझसे रुदादे चमन कहते न डर हमदम,
गिरेगी जिसपै कल बिजली, वह मेरा आशियाँ क्यों हो।


1.कफस - पिंजड़ा, कारागार 2. रुदाद - कहानी, दास्तान

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कल यही ख्वाब हकीकत में बदल जायेंगे,
आज जो ख्वाब फकत ख्वाब नजर आते हैं।
-जानिसार 'अख्तर'

 

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कहते हैं उम्मीद पै जीता है जमाना,
क्या करे जिसकी कोई उम्मीद नहीं है

-'आसी' उल्दानी

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