शेर-ओ-शायरी

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कहते हैं जीते हैं उम्मीद पै लोग,
हमको जीने की उम्मीद नहीं।
-मिर्जा 'गालिब'
 

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कहने को लफ्ज दो हैं, उम्मीद और हरसत,
लेकिन निहां इसी में, दुनिया की दास्तां है।
-नातिक लखनवी


1.हसरत - (i) निराशा, नाउम्मेदी (ii) दुख, कष्ट, मुसीबत (iii) लालसा, इच्छा 2.निहां - गुप्त, छिपा हुआ


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कांटों पर अगर चलना ही पड़े,

मायूस न हो जाना राही,
जब फूल हों दिल के दामन में,

फिर क्या है जो इन्सां कर न सके।
 

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कारगाहे-हयात में ऐ दोस्त यह हकीकत मुझे नजर आई,
हर उजाले में तीरगी देखी, हर अंधेरे में रौशनी पाई।
-'जिगर' मुरादाबादी


1.कारगाह - कार्यालय, कार्य करने का स्थान

2. तीरगी - अंधेरा, अँधियारा।

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