शेर-ओ-शायरी

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गमे-हस्ती का 'असद' किससे जुज-मर्ग इलाज,
शम्अ हर रंग में जलती है सहर होने तक।
-मिर्जा गालिब


1.जुज-मर्ग - मौत के अलावा 2. सहर - सुबह, सबेरा


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गुल अगर इक शम्अ होती हैं हवाए-दहर से,
सैकड़ों उसकी जगह होती हैं रौशन, गम न कर।
-'निहाल' सेहरारवी


1.गुल - बुझना 2.दहर – काल, समय, वक़्त, युग


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लशन की तरफ मुंह किए बैठा हूँ कफस में,
शायद कोई दमसाज निकल जाए इधर भी।

-'साकिब' लखनवी


1.कफस - पिंजड़ा 2. दमसाज -(i) मित्र,सखा, दोस्त, हमदम

(ii) गाने आदि में साथ देने वाला


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जो गम हद से जियादा हो, खुशी नजदीक होती है,
चमकते हैं सितारे रात जब तारीक होती है।

-'अपसर' मेरठी


1.तारीक - अंधेरी

 

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