शेर-ओ-शायरी

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तूले-गमे-हयात से घबरा न ऐ 'जिगर',
ऐसी भी कोई शाम है जिसकी सहर न हो।
-'जिगर' मुरादाबादी


1.तूल - (i) लम्बाई, दीर्घता, आयाम (ii) ढेर, अम्बार
2.हयात - जिन्दगी 3. सहर - सुबह, सबेरा

 

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दिल गवारा नहीं करता शिकस्ते-उम्मीद,
हर तगाफुल पै नवाजिश का गुमां होता है।

-'रविश' सिद्दकी


1.शिकस्त - हार, पराजय, पराभाव 2. तगाफुल - उपेक्षा, अनदेखी, परवा न करना 3. नवाजिश - मेहरबानी, कृपा, इनायत

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दिल नाउम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है,
लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।
-फैज अहमद 'फैज'

 

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धबरा न हिज्र में बहुत ऐ जाने-मुज्तरिब,
थोड़ी ही रह गई है, उसे भी गुजार दे।
-'अमीर'


1.हिज्र - जुदाई, वियोग 2. जाने-मुज्तरिब - व्याकुल जान

 

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