शेर-ओ-शायरी

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अहरमन की बंदगी, जिक्रे-खुदा के साथ-साथ,
हर जमाने में ब - अन्दाजे-दिगर होती रही।
-'असर' सहबाई


1.अहरमन - शैतान 2.बंदगी - पूजा, इबादत, आराधना

3..ब-अन्दाजे-दिगर - अपने-अपने ढंग से

 

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 आज आलम में है सन्नाटा तो है मेरी तलाश,
कल इसी दुदिया को शिकायत थी मेरी फरियाद से।


1.आलम - संसार, दुनिया, जहान


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आज है किस मंजिल पै इंसान,
दिल में अंधेरा, रूख पै उजाले।

 

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इक नहीं मांगी खुदा से आदमीयत की रविश,
और हर शै के लिए बंदे दुआ करते रहे।
-'दीवाना' मोहन सिंह


1.रविश - शैली, तर्ज, आचार-व्यवहार 2. शै - चीज


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