शेर-ओ-शायरी

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मख्मूर अपने दिल में तकब्बुर न लाइए,
दुनिया में हर उरूज का एक दिन जवाल है।
मचलता होगा इन्हीं गालों पर शबाब कभी,
उबलती होगी इन्हीं आंखो से शराब कभी।
मगर अब इनमें वह पहली-सी कोई बात नहीं
जहाँ में आह किसी चीज की सबात नहीं।

-'अख्तर' शीरानी


1.मख्मूर - नशे में चूर, उन्मत्त, मदोन्मत्त 2. तकब्बुर - अभिमान, अहंकार, दर्प, गुरूर अकड़, शेखी3. उरूज - (i) ऊचाई , बुलंदी (ii)
उत्कर्ष, उत्थान, उठान (iii) उन्नति, तरक्की।
4. जवाल - (i) गिराव, पतन (ii) अवनति (iii) ह्रास, कमी 5. शबाब - जवानी, युवावस्था 6. सबात -

(i) दृढ़ता, स्थिरता, स्थायित्व, (ii) मजबूती, पायदारी।
 

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मुकाम ऐसा भी इक आता है राहे-जिन्दगानी में,
जहाँ मंजिल भी गर्दे -कारवाँ मालूम होती है।

-हबीब अहमद सिद्दकी


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मेरे सामने आज बातें बनाना,
जबाँ को थी लुकनत, यह है बात कल की।
-हफीज जौनपुरी


1.लुकनत - हकलाहट, हकलापन

 

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मैंने चाहा था कि पर काट दूँ जिन लम्हों का,
उड़ गये वक्त की मुट्ठी से कबूतर की तरह।

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