शेर-ओ-शायरी

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें,
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें।
-फराज अहमद

 

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अब बुझा दो ये सिसकते हुए यादों के चराग,
इनसे कब हिज्र की रातों में उजाला होगा।
-खलीलुर्रहमान आजमी


1.हिज्र - वियोग, जुदाई

 

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अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें,
कुछ दर्द तो कलेजे से लगाने के लिए हैं।
यह इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें,
इक शख्स की यादों को भुलाने के लिए है।
-नूह नारवी


1. इल्म - विद्या,ज्ञान,जानकारी

2.रिसाला - किसी विषय पर छोटी पुस्तक

 

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आज कैसी हवा चली ऐ 'फिराक',
आंख बेइख्तियार भर आई।
-फिराक गोरखपुरी

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