शेर-ओ-शायरी

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खत्म कर देगी किसी दिन ये तमन्ना-ए-हयात,
रात-दिन कोशिश में जीने की मरा जाता हूँ मैं।
जिन्दगी के दाम इतने गिर गये कुछ गम नहीं,
मौत की बढ़ती हुई कीमत से घबराता हूँ मैं।

-नीरज जैन


1.हयात - जिन्दगी


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खुदाबंदा मेरी गुमराहियों पर दरगुजर फरमां,
मैं उस माहौल में रहता हूँ जिसका नाम दुनिया है।

-अकबर हैदरी


1.खुदाबंदा- हे ईश्वर, हे खुदा 2.दरगुजर - नजरअंदाज, दोष देखकर उसे अनदेखा कर देना, चश्मपोशी

 

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'खुमार' अहले-दुनिया को यह भी गरां है,
लब पै जो थोड़ी-सी हँसी बाकी रह गई है।

-'खुमार' अंसारी


1.अहले-दुनिया - दुनिया वाले 2.गरां - भारी, वजनी, कीमती


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खूबियाँ लाख किसी में हों तो जाहिर न करें,
लोग करते हैं बुरी बात का चर्चा कैसा।


 

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