शेर-ओ-शायरी

<< Previous  ज़माना [Modern times (as opposed to older ones)]   Next>>

गनीमत है कफस, फिक्रे-रिहाई क्यों करें हमदम,
नहीं मालूम अब कैसी हवा चलती हो गुलशन में।

- साकिब लखनवी


1.कफस - पिंजड़ा, कारागार  2.फिक्रे-रिहाई - रिहाई की चिन्ता 3.हमदम - दोस्त, मित्र, हर समय का साथी


*****


गरीब लहरों पै पहरे बिठाये जाते हैं,
समंदरों की कोई तलाशी नहीं लेता।

 

*****

 

 

गुनहगारों में शामिल हैं ,गुनाहों से नहीं वाकिफ,
सजा को जानते हैं हम, खुदा जाने खता क्या है।

-चकबस्त लखनवी


*****


गुलचीं ने तो कोशिश कर डाली, सूनी हो चमन की हर डाली,
कांटों ने मुबारक काम किया, फूलों की हिफाजत कर बैठे।

-शकील बदायुनी


1.गुलचीं - माली, फूल तोड़ने वाला

*****

 

<< Previous    page-1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33  Next>>