शेर-ओ-शायरी

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जब-जब इसे सोचा है दिल थाम लिया मैंने,
इन्सान के हाथों से इन्सान पै जो गुजरी।

-फिराक गोरखपुरी


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जमाने की अदावत का सबब थी दोस्ती जिसकी,
अब उनको दुश्मनी है हमसे दुनिया इसको कहते हैं।

-बेखुद देहलवी


1.अदावत – दुश्मनी 2. सबब - कारण

 

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जितना मल्लाह का डर है मुझको,
उतना तूफान का डर नहीं है।


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जिन्दगी अपने आइने में तुझे अपना चेहरा नजर नहीं आता,
जुल्म करना तो तेरी आदत है, जुल्म सहना मगर नहीं आता।

-नरेश कुमार 'शाद'

 

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