शेर-ओ-शायरी

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डाली गई न अपने गिरेबान पै नजर,
दुनिया हमारे दाग मगर देखती रही।

-साजन पेशावरी


1.गिरेबान - दामन, कमीज का गला


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तुझे अपना समझ कर हांले-दिल कुछ कह दिया मैंने,
वर्ना किसी को दास्ताने-गम सुनाने कौन जाता है।

 

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तुझे ऐ ताइरे -शाखे –नशेमन क्या खबर इसकी,
कमी सैयाद को भी बागबाँ कहना ही पड़ता है।

-जगन्नाथ आजाद


1.ताइरे-शाखे–नशेमन - डाल पर बने घोसले में बैठी पक्षी

 2. सैयाद - बहेलिया 3.बागबाँ - बाग की रखवाली

करने वाला, माली


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तुम्हारे साथ मरेंगे जो हमसे कहते थे,
उठा के ले गए गुलशन से आशियाने को।

-महशर हमरोही


1.आशियाना - घोंसला,नीड़

 

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