शेर-ओ-शायरी

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तूने तो जिस्म ही बेचा है एक फाके को टालने के लिए,
लोग यजदां को बेच देते हैं अपना मतलब निकालने के लिए।

-नरेश कुमार शाद


1.यजदां- खुदा, ईश्वर


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तूफान में गिरा मैं कोई पेड़ तो नहीं,
शाखों की तरह लोग मुझे काटने लगे।

 

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दिल से अरजाँ नहीं दुनिया में कोई भी शै 'साहिर',
बेदिली हमने मगर इससे भी सस्ती देखी।

'साहिर'


1.अरजाँ– सस्ती 2.शै - चीज
3.बेदिली-उदासीनता, उचाटपन,उदासी


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दीखावे के हैं सब ये दुनिया के मेले,
भरी बज्म में हम रहे हैं अकेले।

-अफ्सर मेरठी

 

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