शेर-ओ-शायरी

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दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की,
लोगों ने मेरे सहन से रस्ते बना लिए।

-नरेश कुमार शाद


1.सहन - आँगन


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दुश्मनों से पशेमान होना पड़ा,
दोस्तों का खुलूस आजमाने के बाद।

-'खमार' बारहबंकवीं


1. पशेमान- शर्मिंदा, लज्जित 2.
खुलूस-निष्कपट प्यार, सच्चा प्यार

 जिसमें स्वार्थ न हो

 

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दुश्मनों से प्यार होता जायेगा,
दोस्तों को आजमाते जाइए।


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देख साजन क्या जमाना आ गया,
आदमी से आदमी बेजार है।

-साजन पेशावरी


1.बेजार - परेशान, अप्रसन्न, नाखुश

 

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