शेर-ओ-शायरी

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देखा है जिन्दगी को कुछ इस करीब से,
चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से।

-साहिर लुधियानवी


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दोषी हैं लक्ष्मण, न राम का कुसूर,
इस दौर का तो राम ही लंका में बस गया।

 

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दोस्त या अजीज हैं खुदफरेबियों के नाम,
आज आप के सिवा कोई आप का नहीं।


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दोस्ती और इस जमाने में,
जिक्र करते हैं किस जमाने का।

-नरेश कुमार 'शाद'
 

 

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